वन पर्व  अध्याय ६५

सुदेव उवाच

दुष्करं कुरुतेऽत्यर्थं हीनो यदनय़ा नलः |  १९   क
धारय़त्यात्मनो देहं न शोकेनावसीदति ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति