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शल्य पर्व
अध्याय ४०
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वैशम्पाय़न उवाच
तेन ते हूय़मानस्य राष्ट्रस्यास्य क्षय़ो महान् |  १९   क
तस्यैतत्तपसः कर्म येन ते ह्यनय़ो महान् |  १९   ख
अपां कुञ्जे सरस्वत्यास्तं प्रसादय़ पार्थिव ||  १९   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति