शल्य पर्व  अध्याय ४०

वैशम्पाय़न उवाच

सरस्वतीं ततो गत्वा स राजा वकमव्रवीत् |  २०   क
निपत्य शिरसा भूमौ प्राञ्जलिर्भरतर्षभ ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति