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शल्य पर्व
अध्याय ४०
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वैशम्पाय़न उवाच
पुरा हि नैमिषेय़ाणां सत्रे द्वादशवार्षिके |  ३   क
वृत्ते विश्वजितोऽन्ते वै पाञ्चालानृषय़ोऽगमन् ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति