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शल्य पर्व
अध्याय ४०
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वैशम्पाय़न उवाच
एवमुक्त्वा ततो राजन्नृषीन्सर्वान्प्रतापवान् |  ६   क
जगाम धृतराष्ट्रस्य भवनं व्राह्मणोत्तमः ||  ६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति