आदि पर्व  अध्याय ४१

सूत उवाच

के भवन्तोऽवलम्वन्ते वीरणस्तम्वमाश्रिताः |  ६   क
दुर्वलं खादितैर्मूलैराखुना विलवासिना ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति