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शान्ति पर्व
अध्याय १५१
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भीष्म उवाच
मारुतो वलवान्नित्यं यथैनं नारदोऽव्रवीत् |  १५   क
अहं हि दुर्वलोऽन्येभ्यो वृक्षेभ्यो नात्र संशय़ः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति