अनुशासन पर्व  अध्याय ४१

भीष्म उवाच

आकारं गुरुपत्न्यास्तु विज्ञाय़ स भृगूद्वहः |  ११   क
निजग्राह महातेजा योगेन वलवत्प्रभो |  ११   ख
ववन्ध योगवन्धैश्च तस्याः सर्वेन्द्रिय़ाणि सः ||  ११   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति