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अनुशासन पर्व
अध्याय ४१
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भीष्म उवाच
विपुलस्य गुरौ वृत्तिं भक्तिमात्मनि च प्रभुः |  ३३   क
धर्मे च स्थिरतां दृष्ट्वा साधु साध्वित्युवाच ह ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति