आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ४१

वैशम्पाय़न उवाच

विधिं परममास्थाय़ व्रह्मर्षिविहितं शुभम् |  २   क
सम्प्रीतमनसः सर्वे देवलोक इवामराः ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति