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वन पर्व
अध्याय ४१
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अर्जुन उवाच
युध्येय़ं येन भीष्मेण द्रोणेन च कृपेण च |  ११   क
सूतपुत्रेण च रणे नित्यं कटुकभाषिणा ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति