वन पर्व  अध्याय ४१

भगवानु उवाच

न त्वेतत्सहसा पार्थ मोक्तव्यं पुरुषे क्वचित् |  १५   क
जगद्विनिर्दहेत्सर्वमल्पतेजसि पातितम् ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति