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विराट पर्व
अध्याय ४१
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अर्जुन उवाच
एकान्ते रथमास्थाय़ पद्भ्यां त्वमवपीडय़ |  १७   क
दृढं च रश्मीन्संय़च्छ शङ्खं ध्मास्याम्यहं पुनः ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति