भीष्म पर्व  अध्याय ४१

भीष्म उवाच

प्रीतोऽस्मि पुत्र युध्यस्व जय़माप्नुहि पाण्डव |  ३४   क
यत्तेऽभिलषितं चान्यत्तदवाप्नुहि संय़ुगे ||  ३४   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति