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उद्योग पर्व
अध्याय ८६
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वैशम्पाय़न उवाच
दूतश्च हि हृषीकेशः सम्वन्धी च प्रिय़श्च नः |  १८   क
अपापः कौरवेय़ेषु कथं वन्धनमर्हति ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति