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भीष्म पर्व
अध्याय ४१
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द्रोण उवाच
ध्रुवस्ते विजय़ो राजन्यस्य मन्त्री हरिस्तव |  ५४   क
अहं च त्वाभिजानामि रणे शत्रून्विजेष्यसि ||  ५४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति