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शान्ति पर्व
अध्याय १६१
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वैशम्पाय़न उवाच
अर्थ इत्येव सर्वेषां कर्मणामव्यतिक्रमः |  ११   क
न ऋतेऽर्थेन वर्तेते धर्मकामाविति श्रुतिः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति