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शल्य पर्व
अध्याय ४१
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वैशम्पाय़न उवाच
यस्मान्मा त्वं सरिच्छ्रेष्ठे वञ्चय़ित्वा पुनर्गता |  ३६   क
शोणितं वह कल्याणि रक्षोग्रामणिसंमतम् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति