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शल्य पर्व
अध्याय ४१
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वैशम्पाय़न उवाच
आश्रमो वै वसिष्ठस्य स्थाणुतीर्थेऽभवन्महान् |  ४   क
पूर्वतः पश्चिमश्चासीद्विश्वामित्रस्य धीमतः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति