आदि पर्व  अध्याय ४२

सूत उवाच

तत्र तां भैक्षवत्कन्यां प्रादात्तस्मै महात्मने |  १८   क
नागेन्द्रो वासुकिर्व्रह्मन्न स तां प्रत्यगृह्णत ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति