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अनुशासन पर्व
अध्याय ४२
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भीष्म उवाच
उभौ लोकौ जितौ चापि तथैवामन्यत प्रभुः |  ३   क
कर्मणा तेन कौरव्य तपसा विपुलेन च ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति