आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४२

व्रह्मो उवाच

यदा पश्यति भूतानि प्रसन्नात्मात्मनो हृदि |  ४९   क
स्वय़ंय़ोनिस्तदा सूक्ष्मात्सूक्ष्ममाप्नोत्यनुत्तमम् ||  ४९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति