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शान्ति पर्व
अध्याय २९३
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करालजनक उवाच
त्वङ्मांसं शोणितं चैव मातृजान्यपि शुश्रुम |  १७   क
एवमेतद्द्विजश्रेष्ठ वेदशास्त्रेषु पठ्यते ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति