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सभा पर्व
अध्याय ४२
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वैशम्पाय़न उवाच
ततः स कुरुराजस्य क्रतुः सर्वसमृद्धिमान् |  ३२   क
यूनां प्रीतिकरो राजन्सम्वभौ विपुलौजसः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति