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सभा पर्व
अध्याय ४२
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वैशम्पाय़न उवाच
दिष्ट्या वर्धसि धर्मज्ञ साम्राज्यं प्राप्तवान्विभो |  ३६   क
आजमीढाजमीढानां यशः संवर्धितं त्वय़ा |  ३६   ख
कर्मणैतेन राजेन्द्र धर्मश्च सुमहान्कृतः ||  ३६   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति