वन पर्व  अध्याय ४२

वैशम्पाय़न उवाच

विद्योतय़न्निवाकाशमद्भुतोपमदर्शनः |  ८   क
धनानामीश्वरः श्रीमानर्जुनं द्रष्टुमागतः ||  ८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति