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विराट पर्व
अध्याय ४२
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वैशम्पाय़न उवाच
जानाति हि मतं तेषामतस्त्रासय़तीव नः |  २०   क
अर्जुनेनास्य सम्प्रीतिमधिकामुपलक्षय़े ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति