menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १८
chevron_left
chevron_right
वैशम्पाय़न उवाच
गृहस्थेभ्योऽभिनिर्वृत्ता गृहस्थानेव संश्रिताः |  २८   क
प्रभवं च प्रतिष्ठां च दान्ता निन्दन्त आसते ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति