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शल्य पर्व
अध्याय ४२
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वैशम्पाय़न उवाच
युष्माकं चाप्रसादेन दुष्कृतेन च कर्मणा |  १६   क
पक्षोऽय़ं वर्धतेऽस्माकं यतः स्म व्रह्मराक्षसाः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति