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शल्य पर्व
अध्याय ४२
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वैशम्पाय़न उवाच
महर्षीणां मतं ज्ञात्वा ततः सा सरितां वरा |  २४   क
अरुणामानय़ामास स्वां तनुं पुरुषर्षभ ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति