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शल्य पर्व
अध्याय ४२
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्राप्युपस्पृश्य वलो महात्मा; दत्त्वा च दानानि पृथग्विधानि |  ३८   क
अवाप्य धर्मं परमार्यकर्मा; जगाम सोमस्य महत्स तीर्थम् ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति