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शल्य पर्व
अध्याय ४२
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वैशम्पाय़न उवाच
सेनापत्यं लव्धवान्देवतानां; महासेनो यत्र दैत्यान्तकर्ता |  ४१   क
साक्षाच्चात्र न्यवसत्कार्त्तिकेय़ः; सदा कुमारो यत्र स प्लक्षराजः ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति