आदि पर्व  अध्याय ४३

सूत उवाच

प्रतिश्रुते तु नागेन भरिष्ये भगिनीमिति |  ३   क
जरत्कारुस्तदा वेश्म भुजगस्य जगाम ह ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति