आदि पर्व  अध्याय ४३

सूत उवाच

न मामर्हसि धर्मज्ञ परित्यक्तुमनागसम् |  ३२   क
धर्मे स्थितां स्थितो धर्मे सदा प्रिय़हिते रताम् ||  ३२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति