आदि पर्व  अध्याय ४३

सूत उवाच

एवमुक्तस्तु स मुनिर्भार्यां वचनमव्रवीत् |  ३७   क
यद्युक्तमनुरूपं च जरत्कारुस्तपोधनः ||  ३७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति