आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ४३

व्रह्मो उवाच

अपां धातुरसो नित्यं जिह्वय़ा स तु गृह्यते |  २८   क
जिह्वास्थश्च तथा सोमो रसज्ञाने विधीय़ते ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति