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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
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व्रह्मो उवाच
ज्योतिषश्च गुणो रूपं चक्षुषा तच्च गृह्यते |  २९   क
चक्षुःस्थश्च तथादित्यो रूपज्ञाने विधीय़ते ||  २९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति