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आश्वमेधिक पर्व
अध्याय ४३
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व्रह्मो उवाच
हिमवान्पारिय़ात्रश्च सह्यो विन्ध्यस्त्रिकूटवान् |  ४   क
श्वेतो नीलश्च भासश्च काष्ठवांश्चैव पर्वतः ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति