आश्रमवासिक पर्व  अध्याय ४३

वैशम्पाय़न उवाच

स राजा राजधर्मांश्च व्रह्मोपनिषदं तथा |  २   क
अवाप्तवान्नरश्रेष्ठो वुद्धिनिश्चय़मेव च ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति