सभा पर्व  अध्याय ४३

दुर्योधन उवाच

को हि नाम पुमाँल्लोके मर्षय़िष्यति सत्त्ववान् |  २८   क
सपत्नानृध्यतो दृष्ट्वा हानिमात्मन एव च ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति