सभा पर्व  अध्याय ५

नारद उवाच

कच्चिन्न मानान्मोहाद्वा कामाद्वापि विशां पते |  ८१   क
अर्थिप्रत्यर्थिनः प्राप्तानपास्यसि कथञ्चन ||  ८१   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति