विराट पर्व  अध्याय ४३

कर्ण उवाच

तमग्निमिव दुर्धर्षमसिशक्तिशरेन्धनम् |  १३   क
पाण्डवाग्निमहं दीप्तं प्रदहन्तमिवाहितान् ||  १३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति