उद्योग पर्व  अध्याय ४३

सनत्सुजात उवाच

सम्भोगसंविद्द्विषमेधमानो; दत्तानुतापी कृपणोऽवलीय़ान् |  ११   क
वर्गप्रशंसी वनितासु द्वेष्टा; एतेऽपरे सप्त नृशंसधर्माः ||  ११   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति