शल्य पर्व  अध्याय ५७

वासुदेव उवाच

तय़ोः समभवद्युद्धं घोररूपमसंवृतम् |  २९   क
गदानिपातै राजेन्द्र तक्षतोर्वै परस्परम् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति