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मौसल पर्व
अध्याय ५
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वैशम्पाय़न उवाच
पुरीमिमामेष्यति सव्यसाची; स वो दुःखान्मोचय़िता नराग्र्यः |  ११   क
ततो गत्वा केशवस्तं ददर्श; रामं वने स्थितमेकं विविक्ते ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति