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भीष्म पर्व
अध्याय ४३
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सञ्जय़ उवाच
ततो दन्तिसहस्राणि रथानां चापि मारिष |  ८२   क
अश्वौघाः पुरुषौघाश्च विपरीतं समाय़युः ||  ८२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति