वन पर्व  अध्याय १४५

वैशम्पाय़न उवाच

एवमुक्त्वा ततः कृष्णामुवाह स घटोत्कचः |  ७   क
पाण्डूनां मध्यगो वीरः पाण्डवानपि चापरे ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति