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सभा पर्व
अध्याय ३४
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शिशुपाल उवाच
अकस्माद्धर्मपुत्रस्य धर्मात्मेति यशो गतम् |  १५   क
को हि धर्मच्युते पूजामेवं युक्तां प्रय़ोजय़ेत् |  १५   ख
योऽय़ं वृष्णिकुले जातो राजानं हतवान्पुरा ||  १५   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति