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शल्य पर्व
अध्याय ४३
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वैशम्पाय़न उवाच
स तत्र ववृधे लोकानावृत्य ज्वलनात्मजः |  १०   क
ददृशुर्ज्वलनाकारं तं गर्भमथ कृत्तिकाः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति