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शल्य पर्व
अध्याय ४३
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वैशम्पाय़न उवाच
वर्धता चैव गर्भेण पृथिवी तेन रञ्जिता |  १५   क
अतश्च सर्वे संवृत्ता गिरय़ः काञ्चनाकराः ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति